तू मुझे मरद समझती है तो मुझ पैर भरोसा रख. मैं आज तुझे भरपूर जवानी का सुख ही नहीं दूँगा. बल्कि तुझे हैर मुसीबत से बचाऊंगा. तेरा मरद तुझे और भी ख़ुशी ख़ुशी रखेगा. वो कैसे डॉकटोर साहब?
क्योंकि आज के बाद जब वो तुझ पैर चढ़ेगा वो तेरे साथ संभोग कर सकेगा. जो काम वो आजतक नहीं कर पाया तुम दोनो की शादी के बाद आब कर सकेगा. और तब तू उसके बच्चे की माँ भी बन जाएगी. पैर कैसे डॉकटोर साहब. कैसे होगा ये चमत्कार. साहब? गोरी. प्यारी. मैने उसकी फटी चोली अलग करते हुए और उसके बूब्स को मसलना सुरू करते हुई कहा. तेरी योनी का द्वार बंद है उसे आज मैं आपने प्रचंद भीषण लंड से खोल दूँगा ताकि तेरा पति फिर आपना लंड उस्मैन घुसा सके और आपना वीरया उस्मैन डाल सके जिससे तू माँ बन सकेगी. मेरे मसलने से उसके बूब्स बड़े बड़े होने लगे थे और कठोर भी. उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़. क्या लगती थी वो आपनी पूरी नग्नता मैं उन सॉलीद बूब्स पैर वो गोल छ्छोटी चुचिया भी बहुत बेचेन कर रही थी मुझे. उसका पूरा बदन आब बुरी तरह तड़प रहा था. नशीले बदन पैर पसीने की हल्की छ्छोटी बूँदें भी उभर आई थी. मेरा लंड बहुत ही तूफ़ानी हो रहा था और आब उसके आज़ाद होने का वक़्त आ गया था.
डॉकटोर साहब मुझे बहुत दर लग रहा है मेरी इज़्ज़त से मत खेलिए ना. जाने दीजिए. मेरा बदन. उईइमाा. मुझ पैर यक़ीन करो गोरी. ये एक मरद का वादा है तुझसे. मैं सब देख लूंगा. तेरा बदन तड़प रहा है गोरी. एक मरद के लिए तेरी छूट का बहता पानी. तेरे कसते होइ बूब्स साफ़ कह रहे हैं की आब तुझे संभोग चाहिए. साहब. हाँ. गोरी मेरी रानी. बोल. मैं माँ बनूँगी ना. हाँ. मेरा मरद मुझे आपने साथ रख लेगा ना. मुझे मरेगा तो नहीं ना. हाँ. गोरी. तू बिल्कुल चिंता ना कर.. तो साहब फिर आपनी फ़ीस ले लो आज रात. मेरी जवानी आपकी है ओह. मेरी गोरी. आ. जाअ. और हम दोनो फिर लिपट गाये मेरा लंड विशाल हो उठा. डॉकटोर साहब बहुत प्यासी हूँ. आज तक किसी मर्द ने नहीं सीनचा मुझे. मेरे टन बदन की आग बुझा दो साहब..
तो फिर आ मेरी झांघाऊँ पैर रख दे अपने छूत्टर और लिप्त जा मेरे बदन से. थोड़ी देर बाद मेरे हाथ मेरी कमीज़ के बटनो से खेल रहे थे. कमीज़ उतरी. फिर मेरी पंत. गोरी की नज़र मेरे बदन को घूर रही थी. मेरा उंडेर्वेआर इससे पहले फट जाता मैने उसे उतर डाला. और फिर ज्यों ही मैं सीधा हुआ. मेरे लंड ने आपनी पूरी ख़ूबसोराती से अपने शिकार को पूरा तनकर उठाकर सलाम किया. आपने पूरी लंबाई और बड़े टमाटेर जीतने लाल हेअड़ के साथ गोरी बड़े ज़ोर से चीखी. और बिस्तर से उठकर नंगी ही दरवाज़े की तरफ़ भागी. क्या हुआ गोरी? मैं घबरा गया. मैं ताना हुआ लंड लेकर उसकी तरफ़ दौड़ा. नही मुझे कुच्छ भी नहीं कर'वाना. नहीईए मुझ... मुझे जाअ.... जाने दो.गोरी फिर चीखी. क्या हुआ गोरी? लेकिन मैं उसकी तरफ़ बदता ही रहा. साहब आपका ये लू. लूंनद. ये लंड तो बहुत बड़ा और मोटा है ब्ब्बापप्ररीए बाप. यह तो गढ़े के जैसा है नहीं यह तो मुझे चीर देगा. आओ गोरी. घबराऊ मत. असली मोटे और मज़बूत लंड ही योनी को चीर पाते हैं गौर से देखो इसे छ्ूकर देखो. इस'से प्यार करो और फिर देखो ये तुम्छैइन कीत'ना पागल कर देगा. डॉकटोर साहब. है तो बड़ा ही प्यारा. और बेहद सुंदर मुस्तांद सा. मेरा तो देखते ही इसे चूमने का मान कर रहा है उुुफ़्फ़्फ़्फ़. कितना बड़ा है पैर साहब ये मेरी छूट मैं कैसे घुस पाएगा इतना मोटा. मैं तो मार जाऊंगी. राजन का लंड तो इसके सामने बहुत छ्होटा है जब वो ही नहीं जाता तो. ये कैसे.
यही तो मरद की संभोग कला कौशूल होता है मेरी रानी. छूट खोलना और उसे ढंग से छोड़ना. हैर मरद के बस की बात नहीं. वो भी तेरी छूट जैसी. कुँवारी. क़रारी. तू दर मत सुरू मैं तोड़ा सह लेना बस फिर देखना तू छुड़वते छुड़वते तक जाएगी पैर तेरा मान नहीं भरेगा. चल अब आ जा मेरी जान. अब और सहा नहीं जा रहा. मेरे लंड से खेलो मेरी राअनीए. कह कर मैने उसे उठा लिया बाहों मैं और बिस्तर पैर लिटा दिया. उसकी छूट ही नहीं बल्कि घुटनों तक झांघा भी भीग चुकी थी. बूब्स एकदम सॉलीद और बड़े बड़े हो गाये थे. साँस के साथ उपर नीचे. साँस ज़ोर ज़ोर से चल रही थी.
मैं बिस्तर पैर चढ़ा और उसके पाएत पैर बैठ गया. उन्नत उठे बूब्स के बीच मैं मैने आपने लंबे खड़े लंड तो बिता दिया और दोनो बूब्स हथेली से दबा दिए मेरा लंड बूब्स के बीच मैं फंस गया. उंगलियों से बूब्स के निपपले रग़दते हुए मैं बूब्स को मसलने लगा और लंड से उसके सनकरे क्लेवागे को फुक्क़ करने लगा. उप स्टरोके मैं लंड का लाल हेअड़ नंगा होकर उसके लिप्स से तौछ करता और डॉवन स्टरोके मैं वल्ले की छुड़ाई. उटेजना मैं आकर गोरी ने ज्यों ही चिल्लाने के लिए लिप्स खोले ही थे की मेरे लंड का हेअड़ उस्मैन जाकर अटक गया और वो गो. गो. गू. गूओ. की आवाज़ करने लगी
मैने और ज़ोर लगाया उपर को तो लगभग आगे से 2 -3 इंच लंड उसके मुँह मैं घुस गया. थोड़ी देर की कशमकश के बाद मोटिओं सेट हो गया. और मैं मोटिओं स्वर्ग मैं था. लंड ने स्पीड पकड़ ली थी. गोरी के मुँह भी हेअड़ को मस्त चुस रहा था. और शाफ़्ट उंदार तक जा कर उसके गले तक हित कर रही थी. बूओब्स बड़े विशाल हो गाये थे. आब मैं हल्का सा उठ कर आगे को सरका और गोरी के बूब्स पैर बैठ गया. और मैने जितना पोससीब्ले था लंड उसके मुँह मैं घुसा दिया. मेरी झांघाओं के बीच कसा उसका पूरा बदन मोटिओं बिना पानी की मच्लई की तरह तड़प रहा था.
थोड़ी देर के बाद मैने लंड को निकाला और आब गोरी ने मेरे दोनो एग्गस बराबर टेस्टीकलेस को चटना सुरू किया. बीच मई वो पूरे एक फूट लंबे लंड पैर आपनी जीभ फिरती तो कभी सूपदे को छत लेती. थोड़ी देर के बाद मैने 69 की पॉसीटिओं ले ली तो उसे मेरे काम आंगो और आस पास के अरेआ की पूरी अक्सेस्स मिल गई अब वो मेरे छूत्टर भी चटने लगी मैने भी गांड का छ्छेद उसके मुँह पैर रख दिया. उसने बड़े प्यार से मेरे छूत्टर को हाथों मैं लिया और मेरी गांड के छ्छेद पैर जीभ से चटा. इस बीच मैने भी उसकी छूट को आपनी जीभ से चटा और छोड़ा. पैर वाक़ई उसकी छूट बड़ी कसी थी जीभ तक भी नहीं घुस पा रही थी उस मैं एक बार तो मुझे भी लगा की कहीं वो मार ना जाई मेरा लंड घुस्वते समाया. फिर मैने उसे पलटा कर के उसके बड़े बड़े गोल गोल छूत्टर भी चुसे और छाटे. आब गोरी बड़े ज़ोर ज़ोर से सिसकरी भर रही थी और बीच बीच मैं चिल्ला भी उठति थी. वो मेरे लंड को दोनो हाथों से पकड़े हुए थी और आब काफ़ी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी थी. डॉकटोर साहब. छोड़ दो मुझे. चढ़ जाओ मेरे उपर. घुसा दो डॉकटोर साहब. दया करो मेरे उपर. नहीं तो मैं मार जाऊंगी. चाहे मैं मार ही जाओं पैर अपना ये मोटा सा लोहे का रोड मेरे उंदार डाल दो. देखो साहब मेरी कैसी लाल हो गई है गरम होकर. इसकी आग ठंडी कर दो साहब आपने हतोड़े से. वह क्या मर्दाना मस्त लंड है डॉकटोर साहब आपका. कोई भी लड़की देखते ही मतवाली हो जै और अपने कपड़े खोलकर आपके बिस्तर पैर लेट जै आओ साहब आ जाओ घुसा दो. उुुफ़्फ़्फ़्फ़्फ़.
मेरा लंड भी आब कमउक्ता की सारी हदें पैर कर चुका था. मैं उसकी टांगों के बीच मैं बैठा और उसकी टांगों को हवा मैं व शापे की तरह पूरी खोल कर उठाया और फिर उसकी कमर पकड़ उसकी छूट पैर अपने लौड़े को रखा और आहिस्ता से पैर ज़रा कस कर दबाया. छूट इतनी लुबरिकाटेड थी की लंड का हेअड़ तो घुस ही गया. आह. मरगगा. !! मैं मार गई. डॉकतूर्रर स्साहह्हहाआबबब. घबराऊ नहीं मेरी जान. और मैने लंड को हाथ से पकड़ तोड़ा और घुसाया. वो मुझे ढाका देने लगी वो चिल्ला भी रही थी दर्द के मारे. तब मैने उसे ज़बरदस्ती नीचे पटक्कर. उसपर लाते गया. अपनी छ्हात्ती से उसके बूब्स को मसलते मसलते आधे घुसे लंड को एक ज़बरदस्त शॉट मारा. वो इतनी ज़ोर से चीखी मोटिओं किसी ने मार ही डाला हो. उसका शरीर भी तड़प उठा. और उसने मुझे कस कर जकड़ भी लिया था. मेरे लंड का क़रीब 7 इंच उंदार घुसा हुआ था. और शायद उसकी कौमार्या की झिल्ली जो तनी हुई थी और अभी फ़ात्नी बाक़ी थी. थोड़ी देर बाद जब वो शांत सी हुई तो बोली.
डॉकटोर साहब मुझे छ्छोड़ दो. मैं नहीं सह पाऊँगी आपका लंड. मैने उसके हूंतों पैर अपने हूनत रखे और एक ज़बरदस्त क़िसस दिया जिस्मैईन उसके कठोर बूब्स बुरी तरह कुचल गाये थे. उसकी लंबी बहूं ने एक बार फिर मुझे लपेट लिया और उसकी तँगन भी मेरी टांगों से लिपट रही थी. जैसे ठीक से छुड़ने के लिए पॉसीटिओं ले रही हो. थोड़ी देर मैं जब मुझे लगा की वो दर्द भूल गई है तो अचानक मैने लंड को तोड़ा सा बाहर निकलते हुए एक भरपूर शॉट मारा. लंड का ये प्रहार इतना शक्तिसालि था की वो पस्त हो गई. एक और चीख के साथ एक हल्की सी आवाज़ के साथ उसका कौमार्या आज फट गया था, शादी के एक साल बाद वो भी एक दूसरे मरद से और इस प्रहार से उसका ओर्गास्म भी हो गया. उस'की छूट से रस धार बह निक'ली और बूरी तरह हांफ़ रही थी.
अब गोरी की छूट पूरी लासिली थी और मैं अभी तक नहीं झारा था. मैने ज़ोर डार धाक्कों के साथ उसे छोड़'ना शुरू किया. उस'की तिघ्ट छूट की दीवारों से रग़ाद ख़ाके मेरा लंड छ्हीला जा रहा था. लेकिन मैं रुका नहीं और उसे बूरी तरह छोड़'ता रहा. फिर मैने लंड उस'की छूट से खींच लिया और लंड एक आवाज़ के साथ बाहर आ गया मोटिओं सोड़ा वाटेर की बोट्थले खोली हो. फिर मैने उसे डोगग्य स्टयले में कर दिया और पीच्े से लंड उस'की छूट में डाल उसे छोड़'ने लगा. अब गोरी भी मस्ती में आ गयी और मुझे ज़ोर से छोड़'ने के लिए उक'साने लगी. छोड़ो मुझे. डॉकटोर साहब. फाड़ दो मेरी. डॉकटोर साहब. छ्छोड़ना मत मुझे. बुरी तरह. फाड़ दो मुझे. और ज़ोर से छोड़ दो मुझे. मैं दासी हूँ आपकी. आपकी सेवा करूँगी. रोज़ रात दिन आपके सामने बिल्कुल नंगी होकर रहूंगी. आपके लिए हमेशा तैयार रहूंगी. और जब जब आपका लंड चाहेगा तब तब छुड़वाने के लिए आपके बिस्तर पैर लेट जाऊंगी. पैर मुझे ख़ूब छोड़ो साहब. और ज़ोर से और तेज़ी से छोड़ो साहब. उस रात मैने गोरी को दो बार छोड़ा. दूसरे दिन दोपहर में ठाकुरैईं क्लिनिक में आ गयी मैने उसे बताया की चेक्क उप हो गया है और शाम तक छ्होटा सा ओपेरातिओं हो जाएगा और कल आप'की बहू आप'के घर चली जाएगी. ठाकुरैईं संतुस्ट होकर वापस हवेली चली गयी
आज रात गोरी ख़ुद उतावाली थी की कब रात हो. उसे भी पता था की कल उसे वापस हवेली चले जाना है और आज की रात ही बची है सच्चा मज़ा लूटने का. उसने आज मोटिओं मैने चाहा वैसे कर'ने दिया. एक दूसरे के अंगों को हम दोनों ख़ूब चूसे, प्यार किए सहलाए और जी भर के देखे. फिर मैने गोरी को तरह तरह से काई पोसे में छोड़ा. साथ में आने वाले दिनों में उसे अपने ससुराल में कैसे रह'ना है और क्या कर'ना है सब सम'झा दिया. दूसरे दिन राजन भी शहर से आ गया. मैने उसे समझा दिया की गोरी का ओपेरातिओं हो गया है डॉकटोर साहब गोरी अब मा बनेगी ना? हाँ पैर तुम जल्द बाज़ी मत कर'ना. अभी एक महीने तो गोरी से दूर ही रह'ना. और हाँ इसे बीच बीच में यहाँ चेक्क उप के लिए भेज'ते रह'ना. यह बहुत साव'धानी का काम है राजन ने कुच्छ आसमंजस से हाँ भारी. फिर वह गोरी को ले गया. गोरी मेरे प्लान के अनुसार बीच बीच में क्लिनिक में आती रही. मैं उसे शाम के वक़्त बुलाता जब गाँव के मरीज़ नहीं होते. रात 8 - 9 बजे तक उसे रख उसकी ख़ूब छुड़ाई कर'ता. गोरी भी ख़ूब मस्ती के साथ मुझ से छुड़'टी.
दो महीने बाद गोरी के ग़रभ तहर गया. मैने गोरी को समझा दिया की वह राजन से अब छुड़वाए. उसकी छूट को तो मेरे 10" के लंड ने पहले ही भोस'दा बना दिया था जहाँ अब राजन का लंड आराम से चला जाता. राजन भी बहुत ख़ुश था की डॉकटोर साहब के कारण ही अब वह अपनी बीवी को छोड़ पा रहा है गोरी पह'ले ही मेरी दीवानी बन चुकी थी. ठाकुरैईं को जब पता चला की गोरी के पान'व भारी हो गाये हैं तो उस'ने क्लिनिक में आ मेरा शुक्रिया अदा किया. में तो ख़ुश था ही और अब किसी दूसरी गोरी की उम्मेद में आप'ना क्लिनिक चला रहा हूँ. |